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!! Shrimad Bhagwat Katha, GSD Hospital:- 13-01-2022 To 19-01-2022, Time:- 4:00 pm To 7:00 pm, Place: - Gau Seva Dham Hospital, NH-19, Hodal (Palwal) hr. -121106 !!

गौ सेवा धाम में धूमधाम से मनाया गया गोपाष्टमी पर्व

गौ सेवा धाम में धूमधाम से मनाया गया गोपाष्टमी पर्व

गौ सेवा धाम में धूमधाम से मनाया गया गोपाष्टमी पर्व

 
गौवंश के लिये पूर्णतः समर्पित है गौ सेवा धाम हाँस्पीटल
 
गौ सेवा धाम में आयोजित हुआ गायों हेतू भंडारा
 
गाय को भारतवर्ष की प्राचीन संस्कृति का प्रतीक माना जाता है और गोपाष्टमी का पावन पर्व इन्हीं गायों को समर्पित है। द्वापर युग से ये पवित्र उत्सव आम जन-मानस के बीच हर्षाेल्लास से मनाया जाता है। गाय की महिमा का वर्णन स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने अपने श्रीमुख से किया है। गायों की सेवा एवं उनका पालन करने के कारण ही श्रीकृष्ण को गोविन्द तथा गोपाल के नाम से  भी जाना जाता है। कहा जाता है कि जिस दिन बाल कृष्ण ने सर्वप्रथम गौ चारण किया था उस दिन की तिथि को अष्टमी थी एवं तभी से ये गोपाष्टमी का पावन पर्व प्रारम्भ हुआ। इस दिन गोपालक अपनी-अपनी गायों का भांति भांति से साज श्रगांर करते हैं। 
इसी कड़ी में गौ सेवा के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त प्रसिद्ध कथा वाचिका देवी चित्रलेखा जी के गौ सेवा धाम हाँस्पीटल में गोपाष्टमी का पर्व धूमधाम एवं सेवाभाव से मनाया गया। सूर्यादय के साथ ही दूरदराज अन्य राज्यों से पधारे गौ भक्तों ने देवी चित्रलेखा जी के साथ भजन-कीर्तन, हवन तथा गौमाता का पूजन किया। 
समस्त कार्यक्रम में बाहर से पधारे श्रद्धालु व  गोसेवा धाम सेवा धाम हॉस्पिटल का स्टाफ अन्य सभी लोग मास्क लगाए हुए नजर आए और कोरोना प्रोटोकॉल का भी पालन करते दिखे।
भगवान कृष्ण की गौ सेवा करते हुये झाँकी मुख्य आकर्षण का केन्द्र रही। दिन के मध्य में गौवंश के लिये भंडारा प्रसाद का आयोजन किया गया। जिसमें हरा चारा, गुड़, मीठा दलिया, रोटी, गन्ना आदि का वितरण न केवल गौ सेवा धाम में अपितु क्षेत्र की दर्जनों गौशालाओं में भी गौ सेवा धाम की तरफ से वितरित किया गया।
गौ सेवा धाम हॉस्पिटल में लगी बड़ी ऑटोमेटिक रोटी मेकर मशीन से हजारों रोटियां बना कर आसपास की गौशालाओं को भेजी गई, सिर्फ रोटी ही नहीं उसके साथ मीठा दलिया हरी सब्जी, हरा गन्ना व अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ गौशालाओं को भेजे गए।
 कोरोना काल में जब इस तरह की सेवा की सबसे ज्यादा आवश्यकता है ऐसे में गौ सेवा धाम हाँस्पीटल की तरफ से इस तरह की सेवा किया जाना वाकई में प्रशंसनीय है। 
 
गौ सेवा धाम में आयोजित भागवत कथा में आये गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष
गोपाष्टमी के कार्यक्रम के बाद संध्या काल में गौ सेवा धाम में सप्तदिवसीय गोपाष्टमी कथा महोत्सव का भी आयोजन किया गया। कथा के छठे दिन कथा व्यास पूज्या देवी चित्रलेखा जी ने बाल गोपाल की नटखट क्रीड़ायें, गौ चारण, गोवर्धन लीला आदि का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा में हरियाणा गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री श्रवण कुमार गर्ग जी का भी आगमन हुआ। समम्त गौ सेवा धाम हाँस्पीटल का भ्रमण कर यहाँ हो रही गौ सेवा से वह अत्यधिक प्रभावित हुये। व्यासपीठ से आर्शीवाद लेने के बाद उन्होनें यहाँ हो रहे सेवा कार्यों की प्रंशसा की। उन्होने कहा कि जिस स्थान पर गाय निर्भय होकर सांस लेती है वह स्थान अत्यधिक पवित्र एवं पुण्यवान होता है। ऐसे स्थान पर किये गये जप-तप अपेक्षाकृत जल्दी फल देने वाले होते हैं। समस्त कथा आयोजन में कोविड प्रोटोकोल का पूर्णतः पालन किया गया। समस्त श्रोतागण उचित सामाजिक दूरी के साथ मास्क पहने हुये उपस्थित रहे।
 
विदित रहे कि गौ सेवा धाम हाँस्पीटल में बीमार, लाचार, असहाय एवं दुर्घटनाग्रस्त गौंवश का निःशुल्क उपचार किया जाता है। यहाँ अत्याधुनिक मशीन, लिफ्ट युक्त एम्बुलैंस, गायों को उनकी बीमारी के अनुसार रखने के लिये अलग-अलग वार्ड, प्रशिक्षित चिकित्सक, कुशल गौ सेवक, अत्याधुनिक मेडिकल उपकरण आदि की पूर्ण सुविधा है। जो कि यहाँ की चिकित्सा सुविधा को कहीं बेहतर बनाती है। इन्हीं कारणों से गौ सेवा धाम हाँस्पीटल न सिर्फ क्षेत्र में अपितु सम्पूर्ण देश तथा विदेशों में भी जाना जाता है। यह संस्थान लगभग 10 वर्षां से गौवशं की सेवा में पूर्णतः समर्पित है।
 
 
 
 
 

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कथा के मध्य धूम धाम से मनाया मकर संक्रांति का त्यौहार।

कथा के मध्य धूम धाम से मनाया मकर संक्रांति का त्यौहार।

कथा के मध्य धूम धाम से मनाया मकर संक्रांति का त्यौहार।

गौवंश को वितरण किये गरम कम्बल और गुड तिल के लड्डू।

मकर संक्रांति पर भक्तों ने गाय को समर्पित किये अन्न वस्त्र और मीठा दलिया।

हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी क्षेत्र के प्रितिष्ठित पशु अस्पताल में धूम धाम से मनाया गया मकर संक्रांति का त्यौहार।
कोटवन - करमन बॉर्डर पर इस्थित देवी चित्रलेखाजी के सानिध्य में बीमार पशुओं के लिए निशुल्क संचालित गौ सेवा धाम हॉस्पिटल में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद भागवत कथा एवं श्रीराधा चरितामृत कथा के द्वितीया दिवस के मध्य में मकर संक्रांति के त्यौहार बड़े ही धूम धाम से मनाया गया। 
इस अवसर पर गौमाताओं को गुड तिल के लड्डू, मीठा दलिया, गरम गरम औटि, हरा चारा, ताज़ी सब्जियां खिलाकर मकर संक्रांति का  त्यौहार मनाया गया, बाहर से आये भक्तों ने गौमाता को गरम कम्बल उढ़ाये, साथ ही यहां कार्य कर रहे सेवकों को भी मिठाई, तिल के लड्डू, मूंगफली व कम्बल बांटे। 

यहां चल रही कथा में देवी चित्रलेखाजी ने श्री राधा रानी के चरित्र का वर्णन किया और साथ ही मकर संक्रांति के पावन त्यौहार के बारे में बताया की 
मकर संक्रांति का त्योहार, सूर्य के उत्तरायन होने पर मनाया जाता है। भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में मकर संक्रांति के पर्व को अलग-अलग तरह से मनाया जाता है। 
अलग-अलग मान्यताओं के अनुसार इस पर्व के पकवान भी अलग-अलग होते हैं, लेकिन दाल और चावल की खिचड़ी इस पर्व की प्रमुख पहचान बन चुकी है। विशेष रूप से गुड़ और घी के साथ खिचड़ी खाने का महत्व है। इसके अलावा तिल और गुड़ का भी मकर संक्राति पर बेहद महत्व है। 
इस दिन पतंग उड़ाने का भी विशेष महत्व होता है। इस दिन कई स्थानों पर पतंगबाजी के बड़े-बड़े आयोजन भी किए जाते हैं। लोग बेहद आनंद और उल्लास के साथ पतंगबाजी करते हैं। 
देवीजी ने कहा की पतंग से पक्षिओं को होने वाले नुकसान को भी नज़र अंदाज न करें, पक्षिओं की सुरक्षा का ध्यान रखें, अगर पतंग में उलझकर कोई पक्षी घायल हो जाता है तो उसे जल्द से जल्द नजदीक पशु अस्पताल ले जाकर उसका उचित उपचार कराएं। 
भजन संकीर्तन करते हुए अपने त्यौहार को मनाएं।

नववर्ष की शुरुआत, गायों का भोज व हरिनाम संकीर्तन के साथ।  पढ़िए पूरी खबर

नववर्ष की शुरुआत, गायों का भोज व हरिनाम संकीर्तन के साथ। पढ़िए पूरी खबर

नववर्ष पर गौवंश को हरा चारा, श्रद्धालुओं को भोजन और श्रीराधा नाम संकीर्तन | नए साल की शुरुआत गौमाताओं के साथ।

 

वैसे तो नववर्ष को देश विदेश में सभी अपने अपने तरीके से जश्न मनाकर जाने वाले साल को विदा और आने वाले साल का स्वागत करते हैं ।

वैसे ही हर वर्ष की भाँती इस वर्ष भी करमन बार्डर स्थित क्षेत्र के प्रतिष्ठित गौ सेवा धाम हाँस्पीटल ने नये साल का स्वागत घायल, बीमार तथा दुर्घटनाग्रस्त गौंवश की सेवा कर किया। दूर-दराज के क्षेत्रों से आये श्रद्धालुओं ने सर्वप्रथम पावन गौ सेवा धाम की परिक्रमा करते हुये संकीर्तन किया। तत्पश्चात हवन, यज्ञ तथा गौ आरती के साथ नववर्ष के कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद उपचाराधीन गौंवश को अपने-अपने हाथों से गुड़, हरा चारा, गन्ना, दलिया आदि खिलाकर यहां पधारे श्रद्धालुगणों ने गौ सेवा की। नए साल के अवसर पर हाँस्पीटल की संचालिका देवी चित्रलेखा जी ने अपने भक्तों से डिजिटल माध्यम से जुड़ते हुए इस नए साल में जीवन को सकारात्मक विचारों से भर देने वाली कुछ बातें साझा करते हुए कहा कि जैसा आप अपने बच्चों को सिखाओगे वैसा ही वो सीखेंगे
हर त्यौहार पर हमे बच्चों को सामाजिक व सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाले कार्यक्रमों से जोड़ना चाहिए।
अगर आप आप हर त्यौहार को किसी जरूरतमंद की मदद करते हैं तो आपको किसी शुभकामनायों की जरुरत भी न पड़ेगी।
बीते 2 साल हमारी जिंदगी में विपत्ति भरे जरूर रहे लेकिन हम सबने सकारात्मक विचारो के सहारे उन मुश्किल दिनों को भी पार किया अब हमे जरुरत है सकारात्मक विचारों के साथ नए साल की शुरुरात करें।
कोरोना जैसी महामारी जैसी आपदा से लड़ने के लिए कोरोना की दवाई के साथ साथ जरूरत है मजबूत आत्मबल की क्यूंकि आत्मबल मजबूत होगा तभी आप हर लड़ाई जीत पाओगे और सकारात्मक रह सकोगे
कार्यक्रम में मौजूद सैकड़ों भक्तों के लिए भंडारा प्रसाद का आयोजन भी किया गया, समस्त कार्यक्रम में राधा कृष्ण और सुदामा की झांकियां मुख्य आकर्षण का केंद्र रही।

आपको बता दें कि गौ सेवा धाम नित्य तथा निरंतर गौ सेवा में कार्यरत है। गौसेवा धाम हाँस्पीटल असहाय गौवंश तथा अन्य जीव-जन्तुओं का निःशुल्क उपचार करता है। यहाँ वर्षभर असहाय जीव-जन्तु चिकित्सा सुविधा प्राप्त करते हैं।
समस्त कार्यक्रम में कोरोना गाइडलाइंस का पालन किया गया अधिकतर भक्त मास्क पहने हुए नजर आए।

Gopashtami festival celebrated with pomp in Gauseva Dham Hospital.

Gopashtami festival celebrated with pomp in Gauseva Dham Hospital.

गौसेवा धाम हाँस्पीटल में धूमधाम से मनाया गया गोपाष्टमी पर्व                

गोपाष्टमी पर गौवंश को लगाया 56 भोग

 

गोपाष्टमी ब्रज में संस्कृति का एक प्रमुख पर्व है। गायों की रक्षा करने के कारण भगवान श्री कृष्ण जी का अतिप्रिय नाम 'गोविन्द' पड़ा। इसी समय से गोपष्टमी का पर्व मनाया जाने लगा, जो कि अब तक चला आ रहा है।

गोपाष्टमी पर्व को गौ सेवा धाम हॉस्पिटल में भी गौमाता को 56 भोग लगाकर गौ महाभोज विशाल भंडारा आयोजन कर बड़े धाम से मनाया गया

 हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी क्षेत्र के प्रतिष्ठित गौ सेवा धाम हाँस्पीटल में राष्ट्रीय पर्व गोपाष्टमी बड़े धूमधाम से मनाया गया। प्रातःकाल गौ सेवा धाम के सेवकजनों ने देवी चित्रलेखाजी व बाहर से आये हुए सैकड़ों गौभक्तों के साथ मिलकर गायों के लिए विशाल हवन पूजन तथा आरती के साथ उत्सव का शुभारभं किया गया। आये हुए भक्तों  ने गौ और गोपाल की मानमोहक झांकी स्वरूप के भी दर्शन किये।

मध्य में गायों हेतू गौमहाभोज में कई सौ किलो मीठा दलिया, 5  कुंटल गुड़, 100 कुंटल गन्ना, हरा चारा, रोटी, फल तथा सब्जियों के साथ छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भण्डारा प्रसाद आयोजित किया गया।

यह प्रसाद गौ सेवा धाम की तरफ से हरयाणा  यूपी व राजस्थान की दर्जनों गौशालओं में भी वितरित किया गया। ऐसा पहली बार नहीं की गौ सेवा धाम ने आस पास की समस्त की गौशाला के साथ मिलकर गोपाष्टमी का पर्व मनाया हो इस से पूर्व में भी गौ सेवा धाम हर वर्ष गौशालाओं को तैयार  किये हुए व्यंजन जैसे मीठा दलिया गुड रोटी आदि खाद्य पदार्थ गौशलों को भिजवाते आये है।

गौ सेवा धाम हाँस्पीटल में असहाय, दुर्घटनाग्रस्त, बीमार गौवंश का निःशुल्क उपचार किया जाता है। आवश्यकता होने पर आसपास की गौशालाओं में रह रहे गौंवश की चिकित्सा सेवा हेतू भी गौसेवा धाम हाँस्पीटल सदैव तत्पर रहता है। गोपाष्टमी के अवसर पर क्षेत्र की गौशालाओं हेतू भोजन की व्यवस्था भी करने से गौसेवा धाम हाँस्पीटल ने गौ सेवा हेतू उत्तम उदारण प्रस्तुत किया है। गौ रक्षा दल, कई गौशाला समितियों तथा क्षेत्रवासियों ने गौ सेवा धाम के द्वारा की जा रही गौसेवा का स्वागत किया। गौसेवा धाम हाँस्पीटल की संचालिका देवी चित्रलेखा जी  की सु मधुर वाणी में संकीर्तन यात्रा के अतंर्गत सप्तदिवसीय गोपाष्टमी महोत्सव एवं श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन भी किया जा रहा है। उन्होनें बताया की गौ सेवा धाम हाँस्पीटल प्रत्येक दिन गोपाष्टमी के भाव में ही रहकर गौ सेवा करता है। दुर्घटनाग्रस्त गौंवश के छोटे उपचार से लेकर बड़े आपरेशन तक यहाँ किये जाते हैं। साथ ही अन्य घायल जीव जैसे बन्दर, कुत्ता, मोर, नीलगाय आदि का भी गौ सेवा धाम में निःशुल्क उपचार किया जाता है।

समस्त गोपाष्टमी कार्यक्रम के पूर्ण होने पर गौसेवकों तथा आम जनमानस हेतू भी भोजन प्रसाद की व्यवस्था की गई। गौ महाभोज में गौसेवा धाम हॉस्पिटल व गौरक्षा दल होडल तथा कोसीकलाँ के कार्यकर्ताओं का विशेष सहयोग रहा।

गौ सेवा धाम  गाय के गोबर से बने दीपक और धूपबत्ती से देगा स्वदेशी आंदोलन को बढ़ावा।

गौ सेवा धाम गाय के गोबर से बने दीपक और धूपबत्ती से देगा स्वदेशी आंदोलन को बढ़ावा।

दीपावली के अवसर पर क्षेत्र के प्रतिष्ठित गौ सेवा धाम हॉस्पिटल मे गायों की सेवा के साथ साथ जैविक रूप से अब दीपक, धूपबत्ती बनायीं जा रही है।

दीपक स्वचालित रूप से दीपावली से सम्बंधित है जो वर्ष का वह त्यौहार है। जब हम दीपक खरीदते है। दीपक जलाना, अंधकार को दूर करने और बुराई पर अच्छाई की जीत, अज्ञान पर ज्ञान का प्रतीक हैं। इसके अलावा यह माना जाता है कि धन की देवी, लक्ष्मी के स्वागत के लिए, गाय के गोबर से बना दीपक कल्याणकारी होता है।

हॉस्पिटल के माहासचिव प्रत्यक्ष शर्मा  ने बताया की सरकार की वोकल फॉर लोकल नीति को बढ़ावा देने के लिए गो सेवा धाम  मे अब दीपक, धूपबत्ती का उत्पादन कर रहे है। इस कार्य से आसपास के असहाय गोवंश तथा जीव-जंतु के लालन पालन तथा उपचार मे  सहयोग रहेगा। हज़ारो गाय आधारित उद्धमियों /किसानो /महिला उद्धमियों को व्यवसाय के अवसर पैदा करने, गाय के गोबर के उत्पादों के उपयोग से वातावरण स्वच्छ और स्वस्थ बनेगा, साथ ही गाय के गोबर से ही केचुआ की मदद से  जैविक खाद भी तैयार किया जा रहे है ज़िसके प्रयोग से किसान बगैर रसायनिक खाद के ही खेती मै अच्छी  फसल ले सकेंगे,

 इससे गौशाला को 'आत्मनिर्भर' बनने मे भी मदद मिलेगी। चीनी निर्मित उत्पादों की जगह पर्यावरण के अनुकूल विकल्प प्रदान करके, अभियान 'मेक इन इंडिया' विज़न और प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी के मिशन को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरणीय क्षति को कम करते हुए स्वदेशी आंदोलन को भी बढ़ावा देगा। इसके साथ ही हॉस्पिटल की संचालिका तथा प्रसिद्ध कथवाचिका पूज्य देवी चित्रलेखा जी का कहना है की भारतीय त्यौहार पर विदेशी कंपनी से खरीददारी करना उचित नहीं है। अपने स्थानीय स्तर पर भारतीय सामान कि ही खरीददारी कर उनको आर्थिक रूप से सक्षम बनाये।

अपने सुपुत्र के स्वास्थ्य लाभ हेतु  कराया गौ हवन पूजन।

अपने सुपुत्र के स्वास्थ्य लाभ हेतु कराया गौ हवन पूजन।

गौ सेवा धाम हॉस्पिटल में हुए हवन और पूजा अनुष्ठान को इंग्लैंड के किशोर कुमार गुप्ता अपने पुत्र नरेश कुमार गुप्ता के स्वास्थ्य के लिए संपन्न कराया। इस मौके पर देवी चित्रलेखाजी के साथ मिलकर गौ सेवा धाम के समस्त कर्मचारी व पदाधिकारियों ने हवन यज्ञ में आहुति दी। गौ सेवा धाम के महामंत्री प्रत्यक्ष शर्मा ने बताया की भारतीय मूल के किशोर गुप्ता जो की अब इंग्लैंड में रहने लगे हैं।  किशोर गुप्ता के पुत्र नरेश गुप्ता जो की लकवा की वजह से चल फिर नहीं सकते और न ही वो भारत आ सकते हैं । किशोर और उनके पुत्र का बहुत मन था की वो भारत आकर गौवंश के बीच एक हवन पूजन का आयोजन करें, पर कोरोना और कम समय के चलते वो भारत न आ सकते इसीलिए किशोर जी और उनका पूरा परिवार  डिजिटल माध्यम की मदद से इस समस्त कार्यक्रम से वीडियो कॉल से जुड़े

किशोर ने हवन के साथ यहां भर्ती गौवंश के लिए मीठा दलिया व हरी सब्जियों का भंडारा कराया

साथ ही उन्होंने यहां काम आने वाली कुछ मशीनें भी गौ सेवा धाम को समर्पित करी।

गौ सेवा धाम की संचालिका देवी चित्रलेखाजी ने बताया की ऐसा पहली बार नहीं है की जब कोई अपने परिवार की शांति के लिए गौ सेवा धाम में हवन पूजा करा रहा हो इस से पूर्व में भी गौ सेवा धाम में बाहर विदेश में रह रहे भारतीय मूल के लोग इस तरह के आयोजन कराते आये हैं।

देवी चित्रलेखाजी ने बताया कि मानव जीवन में यज्ञ को सर्वश्रेष्ठ कर्म माना गया है। प्राचीन हिंदू सनातन परम्परा से आधुनिक युग तक यज्ञ मनुष्य के जीवन का अभिन्न अंग रहा है। हिन्दू समाज में अगर घर में कोई भी शुभ कार्य हो या परिवार की शांति या पर्यावरण की रक्षा की बात हो तो हवन का महत्व और भी बढ़ जाता है

देवी चित्रलेखाजी ने बताया की हवन में गौ माता के गोबर से बने उपले, लड़की व गाय के घी का उपयोग किया गया ताकि ज्यादा से ज्यादा ऑक्सीजन पैदा किया जा सके।  साथ ही बताया की ऑक्सीजन चाहिए तो गाय के घी से ही हवन करें, क्यूंकि एक चम्मच गाय के घी से हवन करने से एक टन आक्सीजन बनती है जो नौ वर्ग किलोमीटर के वातावरण को शुद्ध बनाती है।

Cow eating Plastic, left helpless by us

Cow eating Plastic, left helpless by us

कभी हिष्ट- पुष्ट दिखने वाली गाय आज एक एक सांस को मौहताज हो गयी है - कारण है पॉलिथीन प्लास्टिक कचरे के लगे ढेर |


जिस सनातनी धर्म देश भारत में गाय को मां का दर्जा दिया गया है उसी देश में गौवंश की र्दुदशा आम तस्वीर हो गई है।
कभी भूख से मरती गाय तो कभी प्लास्टिक और कचरा खाती गाय हमें जरूर दिख जाती है और तब याद आते है गोवंश को बचाने का दावा और वादे करने वाली सरकार।
कथनी और करनी में बहुत सारा फरक तब साफ़ दिखाई पड़ता है जब सड़कों पर अनाथ,बेसहारा घूमता गौवंश कचरे से गंदगी व पॉलिथीन खाने को मजबूर हैं। सुख.समृद्धि की प्रतीक रही भारतीय गाय आज कूड़े के ढेर में कचरा और प्लास्टिक की थैलियां खाती और फिर अपनी जान गवा देती

भारत भूमि में गाय की महिमा आदिकाल से रही है। हर हिन्दू घर में सबसे पहली रोटी गाय की और दूसरी रोटी कुत्ते की निकाली जाती थी।   यह विडंबना ही है कि भारत में  पूजनीय मानी जाने वाली गौवंश  की आज घोर उपेक्षा की जा रही है। शहर में जगह-जगह लगे प्लास्टिक के ढेर पर मुंह मारती गायों के दृश्य आम हैं। जरुरत से ज्यादा पॉलीथिन का प्रयोग न सिर्फ गौवंश अपितु मानव प्रजाति  के लिए भी जानलेवा साबित हो रही है।
घरों से सब्जियों फलों के निकले छिलके और अन्य खाद्य सामग्री पॉलिथीन में बांधकर कूड़े के ढेर पर फेंकी जा रही हैं। जहां बेसहारा गोवंश भोजन की तलाश में पहुंचते हैं और पूरा ही पॉलीथिन का पैकेट खा जाते है जिस से कभी न गलने वाली प्लास्टिक उनके पेट में जमा होती रहती है

विडंबना है कि देवताओं को भी भोग और मोक्ष प्रदान करने की शक्ति रखने वाली गौमाता आज चारे के अभाव में कूड़े के ढेर में कचरा और प्लास्टिक की थैलिया खाकर  हर महीने हजारों लाखों गोवंश अपनी जान गवां देते है,
क्या कोई है इनकी जिम्मेदारी लेने वाला? सरकार या सम्माज?
 विडंबना तो ये है की न सरकार और न समाज ऐसे गौवंश के लिए जागरूक है, ऐसे में आशा की किरन लिए उपश्तिथ है गौ सेवा धाम हॉस्पिटल जहां ऐसी बीमारी से ग्रसित अनेकों गौवंश का उपचार कर उनके पेट से आधा कुन्टल तक पॉलिथीन निकाली गयी,
इस गौमाता को भी दिल्ली एनसीआर के फरीदाबाद से यहां लाया गया जिसके साथ उसका छोटा सा बचा भी था,
टीम को जानकारी मिली की एक गौवंश ने कई दिनों से खाना पीना बंद कर दिया है और बच्चे को भी दूध पिलाने में अश्मर्थ है, ऐसे में बड़ी चुनौती थी माँ और बच्चे दोनी की जान बचें की ,
गौ सेवा धाम की एम्बुलैंस की मदद से माँ और बच्चे को उपचार क लिए होडल पलवल में स्थित गौ सेवा धाम हॉस्पिटल लाया गया,
गाय के प्राथमिक उपचार और जाँच मै पाया गया की पेट में काफी मात्रा में पॉलिथीन जमा हुआ पड़ा हुआ है, ऐसे में गौ सेवा धाम की चिकित्सक टीम तुरंत लग गयी गौवंश के ओपरेशन में, घंटो चले इस ऑपरेशन में गौवंश के पेट से 50  किलो से ज्यादा प्लास्टिक कचरे के साथ लोहे की क्षड़, सिक्का, नुकीले कील पथ्थर, जैसे कभी न गलने वाले नुकसानदायक पदार्थ निकाले गए,

समय रहते गौवंश और उसके छोटे बच्चे की जान बचा ली गयी, पर न जाने ऐसे कितने गौवंश हैं जो सही समय पर उपचार न मिलने के आभाव में अपने प्राण त्याग  रहे हैं,
गौ सेवा धमहोस्पिटल की संचालिका देवी चित्रलेखाजी द्वारा पिछले 10 वर्षो में भारत के अलग अलग राज्यों में जाकर प्लास्टिक बैन को लेकर अनेकों रैलिया व कार्यक्रम आयोजित कर
लोगों को बताया गया की प्लास्टिक । पॉलीथिन से क्या क्या नुकसान हमें और हमारी प्रकृति को झेलने पड़ते हैं,
आइये हम सब मिलाकर पॉलिथीन और प्लास्टिक के उपयोग को कम कर एक स्वच्छ वातावरण बनाने को आगे आएं
जुड़िये गौ सेवा धाम हॉस्पिटल से |

ऑपरेशन द्वारा गौमाता के पेट से निकाली 55-60kg पॉलीथीन । इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि पॉलिथीन बंद हो
 https://fb.watch/57qlDwZTdG/

 

 

 

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